Thursday, March 31, 2011

एक ख्वाब ........

कैसे कहूँ मुझे तुमसे मोहब्बत है
कभी देखना
मेरी आँखों के सैलाब को
मोहब्बत ही मोहब्बत है

तुम्हारी तो अपनी ही दुनिया है
चाँद तारे हैं
सिंड्रेला सा स्वप्न है
आकांक्षाएं , अभिलाषाएं और कुछ अज़ीज़ हैं

और मैं यायावर
यहाँ चंद कविताएँ , कुछ अधूरे दर्शन
कुछ बिखरे ख्वाब
और जीवन की तमाम समस्याएँ

यहाँ तुम्हारा स्वप्न पूरा नहीं हो सकता
फिर भी कभी देखना
मेरी आँखों के सैलाब को

शायद कुछ ऐसा हो
जो तुम्हारी उन्मुक्तता को नया आयाम दे सके
तुम्हारे सपनो को नया संसार दे सके
तुम्हारे जीवन को नया संगीत दे सके

कभी देखना
मेरी आँखों के सैलाब को
मोहब्बत ही मोहब्बत है

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