Friday, April 8, 2011

नया रास्ता

जीवन के इतने बसंत,
और पतझड़
देखने के बाद

निराशा ,हताशा, अवसाद
और संत्राष से
गुजरने के बाद

आशा,उन्माद , उल्लास
और आनंद से
भरा होने के बाद

पता नहीं क्यूँ
आज एक खोखलेपन
का एहसास मेरे भीतर उतर गया

अब मैं
अकेला , तनहा , उदास
और शायद कुछ
सनकी भी हूँ

अब मैं
धुंधली उमीदों से चिपका
मुक्त जीवन का सपना
देखता हूँ

हाँ मुझमें
यथार्थवाद कि बेहद कमी है'
और भावना बेहद घनी है

मगर मैं अब
वो सपना देखता हूँ
जहाँ भावनाओं का यथार्थ
यंत्रणा से भरा ना हो
जहाँ कोई शुष्क
मानसिक पीड़ा ना हो
जहाँ आनंद और अवसाद
में द्वंद्व ना हो
जहाँ कोई
क्षितिज ना हो................

2 comments:

  1. हाँ मुझमें
    यथार्थवाद कि बेहद कमी है'...............galat hai ....koot koot ke bhara hai.....wakai shaandaar rachna......badhaayi ho...

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  2. marvelous...........true... enriching...but time has changed dear....

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