आसमान पर छाया रहा
आज सूरज भी कुछ
मद्धिम सा जलता रहा
आज शाम भी
कुछ बेचैन ,बेआस थी
आज आँख भी कुछ नम और
बेक़रार थी
आज रात भी
कुछ
अजीब
स्याह है
आज हवा भी कुछ थमी सी है ,
और मिजाज़ भी कुछ परेशान है
आज कोई आहट नहीं
कोई सरगोशी नहीं
आज सन्नाटे के आगोश में
तमन्ना भी कुछ खामोश है
आज चाँद भी नहीं ,
तारे भी नहीं,
आज तुम भी नहीं
तेरी याद भी नहीं
आज मौसम ही कुछ
उदास है...................
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