Tuesday, April 12, 2011

तुम

मेरे पास
बहुत ही पास
रहता था एक पल

और उस एक पल
में अपनी ही दुनिया का
भरम था

एक दिन तुमने
कोशिश की
और उस पल में पनाह ले ली

अब उस पल में
मेरे पास,उस पल के पास
तुम भी रहने लगे

और अब उस पल में
एक नयी ही दुनिया
का भरम था

एक दिन तुमने
पूछा की क्यूँ वो पल
तुमसे भी पास रहता है मेरे

और फिर तुम
उस पल से भी पास
मेरे पास ,रहने लगे

एक दिन तुमने
उस पल को पीछे
बहुत पीछे छोड़ दिया

और अब तुम
सिर्फ तुम रहते थे
एक नए पल में

एक दिन तुमने
उस पल की तरह
मुझे भी पीछे छोड़ दिया

अब मेरे पास
वो पल भी नहीं,
नया पल भी नहीं

अब मेरे पास
कोई पल नहीं
अब अकेला रहता हूँ मैं.............

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